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घोषणापत्र

क्रिकेट में नो बॉल: 5 नियम और सही फैसला

क्रिकेट में नो बॉल गेंदबाज़ की छोटी गलती नहीं, बल्कि नियम-विरुद्ध डिलीवरी पर क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम को मिलने वाला दंड है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम 21 के अनुसार नो बॉल पर बल्लेबाज़ी टीम को कम-...

16 अक्टू॰ 2026 5 MIN READ
क्रिकेट में नो बॉल: 5 नियम और सही फैसला
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क्रिकेट में नो बॉल: 5 नियम और सही फैसला

क्रिकेट में नो बॉल गेंदबाज़ की छोटी गलती नहीं, बल्कि नियम-विरुद्ध डिलीवरी पर क्षेत्ररक्षण करने वाली टीम को मिलने वाला दंड है। मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम 21 के अनुसार नो बॉल पर बल्लेबाज़ी टीम को कम-से-कम 1 अतिरिक्त रन मिलता है, गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती और सीमित ओवर क्रिकेट में अगली गेंद प्रायः फ्री-हिट होती है। फ्रंट-फुट का क्रीज़ से आगे जाना, कमर से ऊपर फुल टॉस, खतरनाक बाउंसर और गलत क्षेत्ररक्षण इसके प्रमुख कारण हैं। टेस्ट, एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में मूल सिद्धांत समान हैं, लेकिन बाउंसर और फ्री-हिट से जुड़े प्रतिस्पर्धात्मक नियम अलग हो सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अंतिम निर्णय मैदानी अंपायर, तीसरे अंपायर और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के निर्देशों से तय होता है। इसलिए स्कोरबोर्ड देखने से पहले गेंद की वैधता जाँचें और नियम 21.1 को आधार मानें।

क्रिकेट मैदान पर अंपायर नो बॉल का संकेत देते हुए, बल्लेबाज़ और गेंदबाज़ तनावपूर्ण क्षण में

क्रिकेट देखने वाले बहुत-से लोग नो बॉल को केवल गेंदबाज़ का पैर क्रीज़ से बाहर पड़ने की गलती समझते हैं। नो बॉल का निर्णय केवल पैर की स्थिति पर निर्भर नहीं करता। गेंद छोड़ने की स्थिति, गेंद की ऊँचाई, बाउंसर की संख्या, विकेटों के पीछे खड़े खिलाड़ियों और बल्लेबाज़ के अधिकार—सब इस फैसले को प्रभावित कर सकते हैं; गलत समझा गया एक रन कभी-कभी पूरे मैच का रुख बदल सकता है।

अधिकृत आधार के रूप में मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के क्रिकेट नियम और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के खेल नियम देखे जा सकते हैं। इन दस्तावेज़ों में नो बॉल, वाइड, ओवर की गिनती, बल्लेबाज़ के आउट होने और दंडात्मक रन की व्याख्या दी गई है। नियम पढ़ते समय यह भी याद रखें कि स्थानीय, जूनियर या टूर्नामेंट क्रिकेट में अलग खेल-शर्तें लागू हो सकती हैं।

नो बॉल की बुनियादी पहचान इस प्रकार करें:

  • गेंदबाज़ का अगला पैर पॉपिंग क्रीज़ की आगे वाली सीमा से पूरी तरह पीछे होना चाहिए।
  • गेंदबाज़ी करते समय पीछे वाला पैर रिटर्न क्रीज़ की सीमा से बाहर नहीं होना चाहिए।
  • कमर से ऊपर की फुल टॉस, परिस्थितियों के अनुसार, नो बॉल हो सकती है।
  • खतरनाक ऊँची गेंद या निर्धारित सीमा से अधिक बाउंसर दंडित हो सकती है।
  • नो बॉल पर बल्लेबाज़ को सामान्यतः रन आउट, कैच आउट, बोल्ड, एलबीडब्ल्यू या स्टंप्ड नहीं दिया जाता।

रुचि हो तो पहले नियमों का यह संक्षिप्त संदर्भ सुरक्षित कर लें।

और जानें

क्या यह सही है कि नो बॉल केवल पैर क्रीज़ से बाहर जाने पर लगती है?

नहीं, यह दावा अधूरा है। नो बॉल फ्रंट-फुट उल्लंघन के अलावा कमर से ऊपर फुल टॉस, खतरनाक बाउंसर, गलत ओवरहेड डिलीवरी, अनुचित क्षेत्ररक्षण और कुछ विशेष गेंदबाज़ी क्रियाओं पर भी लग सकती है। इसलिए केवल गेंदबाज़ के पैर को देखकर फैसला करना नियम 21 की पूरी भावना को नहीं समझता।

फ्रंट-फुट नो बॉल सबसे अधिक दिखाई देने वाला मामला है। डिलीवरी के क्षण गेंदबाज़ के अगले पैर का कुछ हिस्सा पॉपिंग क्रीज़ की आगे वाली सीमा के पीछे जमीन पर होना चाहिए; रेखा पर पैर पड़ना सुरक्षित नहीं माना जाता। यही वह बारीक बात है जिसे टीवी पर धीमी गति के दोहराव में तीसरा अंपायर जाँचता है। गेंदबाज़ का पिछला पैर रिटर्न क्रीज़ से बाहर निकले, तो भी नो बॉल हो सकती है, क्योंकि गेंदबाज़ को निर्धारित कोण और स्थान की मर्यादा रखनी होती है।

गेंद की ऊँचाई भी महत्वपूर्ण है। यदि बिना पिच हुए फुल टॉस बल्लेबाज़ की कमर से ऊपर पहुँचती है, तो वह अक्सर नो बॉल घोषित की जाती है, विशेषकर तेज़ गेंदबाज़ी में। अंपायर गेंद की ऊँचाई का आकलन बल्लेबाज़ के खड़े होने के स्थान और सामान्य मुद्रा के संदर्भ में करता है। इसे हर स्थिति में एक ही स्थिर सेंटीमीटर सीमा समझना गलती है; खिलाड़ी की क्रीज़ पर स्थिति और गेंद की प्रक्षेपवक्र भी देखी जाती है।

कुछ दर्शक कहते हैं कि बल्ले से लगने के बाद नो बॉल खत्म हो जाती है। ऐसा नहीं है। गेंद की वैधता डिलीवरी की शुरुआत और गेंदबाज़ी की शर्तों से तय होती है; बल्लेबाज़ के शॉट से पिछली गलती मिटती नहीं। यदि उसी गेंद पर चौका या छक्का लगता है, तो बल्लेबाज़ी टीम को शॉट के रन के साथ नो बॉल का अतिरिक्त रन मिलता है। यदि गेंद सीमा तक नहीं जाती और बल्लेबाज़ दौड़ता है, तो दौड़े हुए रन भी जुड़ सकते हैं, जबकि नो बॉल का दंड अलग रहता है।

क्रिकेट में वाइड और नो बॉल का अंतर

क्या नो बॉल पर बल्लेबाज़ कभी आउट नहीं हो सकता?

नो बॉल पर बल्लेबाज़ को बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंप्ड नहीं दिया जा सकता, लेकिन वह पूरी तरह सुरक्षित भी नहीं होता। रन आउट, हिट द विकेट, गेंद को दो बार मारना और कुछ परिस्थितियों में मैदान में बाधा डालना अब भी आउट होने के मान्य तरीके हैं। इसलिए “नो बॉल पर आउट नहीं” कहना आधा-सच है, और आधे-सच से स्कोरबुक बिगड़ती है।

नो बॉल पर मिलने वाली सुरक्षा को ठीक से समझना आवश्यक है। यदि तेज़ गेंदबाज़ फ्रंट-फुट नो बॉल करे और बल्लेबाज़ गेंद को सीधे विकेटकीपर के दस्ताने में पहुँचा दे, तो कैच आउट नहीं होगा। इसी तरह गेंद स्टंप पर लग जाए, तब भी बोल्ड नहीं दिया जाएगा। एलबीडब्ल्यू का निर्णय भी सामान्यतः संभव नहीं होता, क्योंकि नो बॉल पर यह आउट का तरीका हट जाता है। मगर बल्लेबाज़ रन लेने के लिए क्रीज़ से बाहर निकला और क्षेत्ररक्षक ने स्टंप तोड़ दिए, तो रन आउट हो सकता है।

हिट द विकेट का मामला अधिक सूक्ष्म है। शॉट खेलते या गेंद रोकते हुए बल्लेबाज़ अपने शरीर या बल्ले से विकेट गिरा दे, तो संबंधित परिस्थितियों में आउट दिया जा सकता है, भले ही डिलीवरी नो बॉल हो। इसी तरह बल्लेबाज़ गेंद को जानबूझकर दूसरी बार मारता है, तो नियमों के अनुसार दंड लागू हो सकता है। अंपायर को गेंद की वैधता और आउट होने के कारण को अलग-अलग देखना पड़ता है; दोनों को एक ही निर्णय समझ लेना सामान्य भूल है।

एक व्यावहारिक बात और। नो बॉल पर बल्लेबाज़ी टीम को अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन सभी रन समान खाते में नहीं जाते। स्कोरर को नो बॉल अतिरिक्त, बाई, लेग बाई और बल्ले से बने रन का सही वर्गीकरण करना होता है। जब गेंद बल्ले से नहीं लगी और बल्लेबाज़ों ने दो रन दौड़े, तो नो बॉल का एक रन तथा दौड़े हुए रन अलग मदों में दर्ज किए जा सकते हैं। यही विवरण आधिकारिक स्कोरकार्ड और गेंद-दर-गेंद आँकड़ों में फर्क पैदा करता है।

अधिक स्पष्टता के लिए यह नियम-सार देखें:

  1. कैच, बोल्ड, एलबीडब्ल्यू और स्टंप्ड सामान्यतः मान्य नहीं।
  2. रन आउट और हिट द विकेट कुछ स्थितियों में मान्य।
  3. नो बॉल का कम-से-कम एक अतिरिक्त रन अनिवार्य।
  4. गेंद ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जाती।
  5. बल्लेबाज़ द्वारा बनाए रन अतिरिक्त दंड से अलग दर्ज होते हैं।

यहीं से पता चलता है कि नियम याद करना और नियम लागू करना दो अलग कौशल हैं।

नियमों का सार देखें

क्या हर नो बॉल के बाद फ्री-हिट मिलती है?

हर क्रिकेट प्रारूप में नहीं। अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में सामान्य नो बॉल के बाद अगली गेंद फ्री-हिट होती है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में सामान्यतः यह व्यवस्था नहीं होती। फ्री-हिट पर बल्लेबाज़ को बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंप्ड होने से वही सुरक्षा मिलती है, पर रन आउट और कुछ अन्य आउट अब भी संभव रहते हैं।

फ्री-हिट का उद्देश्य नो बॉल से मिली अनुचित गेंदबाज़ी का प्रभाव कम करना है। सीमित ओवर क्रिकेट में अंपायर या प्रसारण ग्राफ़िक्स अगली डिलीवरी को फ्री-हिट के रूप में दिखाते हैं। यदि फ्री-हिट वाली गेंद वाइड या फिर नो बॉल हो जाए, तो फ्री-हिट अगली डिलीवरी तक आगे बढ़ती है। यह बिंदु अक्सर छूट जाता है, खासकर अंतिम ओवरों में, जहाँ एक अतिरिक्त गेंद और फ्री-हिट मिलकर मैच का गणित बदल सकती है।

फ्री-हिट का अर्थ यह नहीं कि बल्लेबाज़ को हर प्रकार की सुरक्षा मिल गई। बल्लेबाज़ क्रीज़ से बाहर निकलकर रन आउट हो सकता है। यदि वह गेंद को दो बार मारता है या किसी निषिद्ध तरीके से खेल में बाधा डालता है, तो अंपायर कार्रवाई कर सकता है। इसके अलावा, यदि फ्री-हिट से पहले गेंद वाइड थी, तो वाइड का एक रन भी जुड़ता है और फ्री-हिट की स्थिति कायम रह सकती है। नियम की यह परत स्कोरबोर्ड देखने वालों से अधिक ध्यान माँगती है।

यहाँ प्रारूप के अनुसार अंतर समझें:

  • टेस्ट क्रिकेट: सामान्य नो बॉल के बाद फ्री-हिट प्रायः नहीं।
  • एकदिवसीय क्रिकेट: नो बॉल के बाद अगली वैध डिलीवरी फ्री-हिट।
  • टी20 क्रिकेट: नो बॉल के बाद अगली डिलीवरी सामान्यतः फ्री-हिट।
  • घरेलू प्रतियोगिता: प्रतियोगिता की खेल-शर्तें अंतिम मानी जाती हैं।
  • जूनियर क्रिकेट: बाउंसर और कमर से ऊपर गेंद के नियम अलग हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की खेल-शर्तों में फ्री-हिट का प्रयोग सीमित ओवर प्रारूपों के संदर्भ में स्पष्ट किया जाता है। इसलिए किसी स्थानीय लीग के नियमों को भारत के अंतरराष्ट्रीय टी20 मुकाबले पर लागू करना उचित नहीं होगा।

टीवी अंपायर समीक्षा कक्ष में तीसरे अंपायर फ्रंट-फुट नो बॉल की धीमी गति जाँचते हुए

क्या कमर से ऊपर फुल टॉस और बाउंसर हमेशा नो बॉल होते हैं?

कमर से ऊपर की फुल टॉस को सामान्यतः नो बॉल माना जा सकता है, पर बाउंसर के लिए ऊँचाई, गेंदों की संख्या और प्रतियोगिता के नियम देखना आवश्यक है। एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में निर्धारित बाउंसर सीमा पार होने पर नो बॉल लग सकती है, जबकि टेस्ट क्रिकेट में अनुमत बाउंसरों की संख्या और ऊँचाई का मानक अलग होता है।

कमर से ऊपर फुल टॉस को कई बार बीमर कहा जाता है। तेज़ गेंदबाज़ द्वारा बिना पिच हुए ऐसी गेंद बल्लेबाज़ के सिर या शरीर की ओर आए, तो यह सुरक्षा का गंभीर विषय बन जाती है। अंपायर इसे नो बॉल घोषित कर सकता है और गेंदबाज़ को चेतावनी भी मिल सकती है। दोहराव, जानबूझकर की गई खतरनाक गेंदबाज़ी या बल्लेबाज़ को चोट का स्पष्ट जोखिम होने पर गेंदबाज़ को आक्रमण से हटाया भी जा सकता है। यह केवल रन का दंड नहीं, खिलाड़ी सुरक्षा का प्रावधान है।

बाउंसर में असली समस्या ऊँचाई और आवृत्ति है। किसी प्रारूप में बल्लेबाज़ के सिर के ऊपर से गुजरती गेंद को खतरनाक माना जा सकता है, जबकि कंधे के आसपास की गेंद को वैध बाउंसर माना जाए। अंपायर गेंद की गति, बल्लेबाज़ की मुद्रा और डिलीवरी के बाद उसकी ऊँचाई देखते हैं। एक ही गेंद अलग बल्लेबाज़ों के लिए अलग दिखाई दे सकती है, इसलिए स्थिर कद-सीमा से निर्णय निकालना सरल पर गलत तरीका है।

युवा क्रिकेट में सुरक्षा और भी कठोर हो सकती है। विद्यालय, राज्य संघ या आयु-वर्ग प्रतियोगिता एक ओवर में अनुमत बाउंसरों की संख्या घटा सकती है। कुछ आयोजक कमर से ऊपर की गेंद पर तत्काल नो बॉल और चेतावनी लागू करते हैं, भले ही वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय नियम में व्याख्या अधिक विस्तृत हो। इसलिए मैच शुरू होने से पहले खेल-शर्तों की प्रति पढ़ना कप्तान, कोच और अंपायर—तीनों के लिए आवश्यक है।

विशेषज्ञों के लिए एक उपयोगी निरीक्षण यह है कि नो बॉल का निर्णय केवल परिणाम से नहीं, जोखिम से जुड़ा है। गेंद बल्ले से छूकर चौका बन गई, तब भी खतरनाक डिलीवरी का उल्लंघन समाप्त नहीं होता। दूसरी ओर, बल्लेबाज़ ने गेंद नहीं खेली, तो भी गेंद की ऊँचाई और दिशा के आधार पर नो बॉल लग सकती है। नियमों का उद्देश्य बल्लेबाज़ को अनुचित खतरे से बचाना है, न कि हर ऊँची गेंद को दंडित करना।

क्रिकेट में नो बॉल पर वास्तव में क्या काम करता है?

सही निर्णय के लिए पहले गेंद की वैधता, फिर रन, फिर आउट होने की संभावना और अंत में ओवर की गिनती जाँचें। अंपायर का संकेत, स्कोरर की प्रविष्टि, गेंद-दर-गेंद रिकॉर्ड और प्रतियोगिता की खेल-शर्तें मिलाकर देखने पर भ्रम कम होता है। यही क्रम नियम 21, फ्री-हिट और अतिरिक्त रन को एक साथ समझने का सबसे भरोसेमंद तरीका है।

मैच देखते समय यह पाँच-चरणीय प्रक्रिया अपनाएँ:

  1. पैर देखें: फ्रंट-फुट और रिटर्न क्रीज़ का उल्लंघन हुआ या नहीं।
  2. गेंद की ऊँचाई देखें: फुल टॉस कमर से ऊपर थी या नहीं।
  3. बाउंसर गिनें: उस ओवर में पहले कितनी खतरनाक ऊँची गेंदें हुईं।
  4. अंपायर का संकेत देखें: बाँह फैलाकर दिया गया संकेत नो बॉल बताता है।
  5. अगली गेंद जाँचें: एकदिवसीय या टी20 में वह फ्री-हिट है या नहीं।

इस क्रम का लाभ यह है कि आप टीवी ग्राफ़िक्स पर निर्भर नहीं रहते। कई बार प्रसारण में पहले रन दिखता है और बाद में नो बॉल का संकेत आता है। ऐसे क्षणों में आधिकारिक अंपायर निर्णय सर्वोच्च होता है, न कि दर्शकों की तत्काल प्रतिक्रिया। क्रिकेट स्कोरिंग में एक रन का स्थान भी महत्वपूर्ण है: नो बॉल अतिरिक्त में जाती है, जबकि बल्ले से बने रन बल्लेबाज़ के खाते में दर्ज होते हैं।

मैदान पर कप्तान के लिए भी यही अनुशासन उपयोगी है। नो बॉल के बाद केवल गुस्सा करने से कुछ नहीं बदलता; गेंदबाज़ को क्रीज़ का निशान, रन-अप की लय और फुल टॉस की ऊँचाई सुधारनी चाहिए। बल्लेबाज़ को फ्री-हिट पर हर गेंद छक्का मारने की लालच से बचना चाहिए, क्योंकि रन आउट अब भी संभव है और गलत शॉट विकेट खो सकता है। सीमित ओवर क्रिकेट में जोखिम का सही मूल्यांकन, नियम जानने जितना ही महत्वपूर्ण है।

स्कोरर और प्रशिक्षक को निम्न बिंदु दर्ज करने चाहिए:

  • नो बॉल का कारण: फ्रंट-फुट, बीमर, बाउंसर या अन्य।
  • अतिरिक्त रन और बल्ले से बने रन का अलग लेखा।
  • फ्री-हिट उपलब्ध है या नहीं।
  • चेतावनी या गेंदबाज़ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई।
  • ओवर पूरा करने के लिए कितनी वैध गेंदें शेष हैं।

यह विवरण बाद में खिलाड़ी के अनुशासन और रणनीति का विश्लेषण करने में मदद करता है। पिच रिपोर्ट जैसे क्रिकेट केंद्रित मंच पर मैच समीक्षा करते समय केवल “इतनी नो बॉल हुईं” कहना पर्याप्त नहीं; यह भी देखना चाहिए कि वे पावरप्ले, डेथ ओवर या विकेट गिरने के बाद आईं और उनसे कितने अतिरिक्त रन बने।

नियमों की आधिकारिक भाषा देखने के लिए एमसीसी नियम 21 का विस्तृत पाठ उपयोगी है। वहाँ मूल सिद्धांत स्पष्ट है: “नो बॉल पर कम-से-कम एक रन बल्लेबाज़ी टीम को दिया जाएगा।” यह वाक्य छोटा है, पर अतिरिक्त रन, ओवर की गिनती और वैध आउट के पूरे ढाँचे की शुरुआत यहीं से होती है।

पूरा विश्लेषण पढ़ें

किन नो बॉल धारणाओं को अनदेखा करना चाहिए?

“नो बॉल पर कोई आउट नहीं होता”, “हर नो बॉल पर फ्री-हिट मिलती है” और “पैर रेखा पर हो तो गेंद वैध है”—इन तीनों धारणाओं को अनदेखा करें। सही निर्णय प्रारूप, डिलीवरी के प्रकार, बल्लेबाज़ की स्थिति, अंपायर के आकलन और प्रतियोगिता की खेल-शर्तों पर निर्भर करता है। सरल नारे याद रखना आसान है, पर क्रिकेट नियम सरल नारों से नहीं चलते।

एक और गलत धारणा है कि नो बॉल का अतिरिक्त रन हमेशा कुल स्कोर में केवल एक ही रन जोड़ता है। दंड का न्यूनतम भाग एक रन है, लेकिन गेंद सीमा पार करे, बल्लेबाज़ दौड़े या वाइड और नो बॉल एक साथ लागू हों, तो कुल रन अधिक हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, बल्ले से लगा शॉट चार रन का है और गेंद नो बॉल है, तो कुल पाँच रन दर्ज हो सकते हैं। इसी प्रकार बल्ले से संपर्क न होने पर दौड़े हुए रन बाई या लेग बाई के रूप में दर्ज हो सकते हैं, जबकि नो बॉल अतिरिक्त अलग रहती है।

“टी20 में गेंदबाज़ को केवल पैर की चिंता करनी चाहिए”—यह भी खराब सलाह है। टी20 में फ्री-हिट, डेथ ओवर का दबाव और सीमित गेंदें नो बॉल को महँगा बना देती हैं। एक फ्रंट-फुट नो बॉल से एक अतिरिक्त रन, फ्री-हिट और संभावित सीमा—तीन स्तर का नुकसान बन सकता है। मगर गेंदबाज़ को जानबूझकर धीमी और सुरक्षित गेंद डालनी चाहिए, ऐसा भी नहीं; नियंत्रण और आक्रामकता का संतुलन ही पेशेवर समाधान है।

इन बातों को याद रखें:

  • नो बॉल और वाइड एक ही उल्लंघन नहीं हैं।
  • नो बॉल गेंद ओवर की वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती।
  • फ्री-हिट प्रारूप-विशिष्ट है, सार्वभौमिक नहीं।
  • रन आउट का खतरा नो बॉल पर भी बना रहता है।
  • स्थानीय प्रतियोगिता के नियम अंतरराष्ट्रीय नियमों से अलग हो सकते हैं।

क्रिकेट में सबसे महँगी भूल अक्सर नियम न जानना नहीं, नियम को आधा जानना होती है। यदि अंपायर का निर्णय अस्पष्ट लगे, तो प्रसारण का पुनरावलोकन, आधिकारिक स्कोरकार्ड और प्रतियोगिता की खेल-शर्तें साथ देखकर निष्कर्ष निकालें। सोशल मीडिया की छोटी क्लिप को अंतिम प्रमाण मानना ठीक नहीं, क्योंकि उसमें गेंद छोड़ने का क्षण या कैमरा कोण छूट सकता है।

युवा क्रिकेट अंपायर पिच के किनारे स्कोरबुक में नो बॉल और फ्री-हिट दर्ज करते हुए

निष्कर्ष: नो बॉल का फैसला कैसे याद रखें?

नो बॉल को समझने का सबसे अच्छा सूत्र है: पैर, ऊँचाई, बाउंसर, रन और प्रारूप—इन पाँच चीज़ों को क्रम से जाँचें। नियम 21 के अनुसार न्यूनतम एक अतिरिक्त रन मिलता है, गेंद ओवर में नहीं गिनी जाती और सीमित ओवर क्रिकेट में अगली गेंद सामान्यतः फ्री-हिट होती है। पर रन आउट, हिट द विकेट और स्थानीय खेल-शर्तें इस सामान्य समझ में महत्वपूर्ण अपवाद जोड़ते हैं।

एक दर्शक के रूप में अंपायर का संकेत देखें, स्कोरर की प्रविष्टि समझें और टेस्ट, एकदिवसीय तथा टी20 के अंतर को अलग रखें। खिलाड़ी के रूप में रन-अप, क्रीज़ की दूरी, बाउंसर नियंत्रण और फुल टॉस की ऊँचाई पर काम करें। पिच रिपोर्ट पर मिलने वाली मैच समीक्षा और खिलाड़ी आँकड़ों में नो बॉल की संख्या के साथ उसका समय और प्रभाव भी देखें; पावरप्ले में आया एक अतिरिक्त रन और अंतिम ओवर में आया अतिरिक्त रन समान रणनीतिक अर्थ नहीं रखते।

इस विषय पर आगे पढ़ने के लिए हमारी क्रिकेट अंपायर संकेतों की मार्गदर्शिका और वाइड गेंद के नियम उपयोगी रहेंगी। नियमों को रटने से अधिक जरूरी है उन्हें डिलीवरी-दर-डिलीवरी लागू करना। नियमों का डिलीवरी-दर-डिलीवरी प्रयोग ही उनकी सही समझ सुनिश्चित करता है।

अपनी क्रिकेट समझ को और मजबूत करने के लिए अगला संदर्भ भी देखें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: क्रिकेट में नो बॉल क्या होती है?

उत्तर: नो बॉल वह अवैध डिलीवरी है जिसमें गेंदबाज़ क्रिकेट के निर्धारित गेंदबाज़ी नियमों का उल्लंघन करता है। फ्रंट-फुट का पॉपिंग क्रीज़ से आगे जाना, कमर से ऊपर फुल टॉस और सीमा से अधिक खतरनाक बाउंसर इसके सामान्य कारण हैं। बल्लेबाज़ी टीम को कम-से-कम एक अतिरिक्त रन मिलता है और गेंद ओवर की वैध गेंदों में नहीं गिनी जाती। निर्णय मैदानी अंपायर करता है, जबकि फ्रंट-फुट मामलों में तीसरा अंपायर सहायता दे सकता है।

प्रश्न: नो बॉल पर कितने रन मिलते हैं?

उत्तर: नो बॉल पर कम-से-कम एक अतिरिक्त रन मिलता है, लेकिन कुल रन इससे अधिक हो सकते हैं। यदि बल्लेबाज़ चौका या छक्का लगाता है, तो शॉट के रन और नो बॉल का दंड जुड़ते हैं। गेंद बल्ले से न लगे और बल्लेबाज़ दौड़ें, तो अतिरिक्त दौड़े हुए रन भी कुल स्कोर में शामिल हो सकते हैं। स्कोरर को नो बॉल अतिरिक्त, बाई, लेग बाई और बल्ले से बने रन अलग-अलग दर्ज करने होते हैं।

प्रश्न: नो बॉल और वाइड में क्या अंतर है?

उत्तर: नो बॉल गेंदबाज़ी की वैधता या सुरक्षा से जुड़ा उल्लंघन है, जबकि वाइड ऐसी गेंद है जो बल्लेबाज़ की सामान्य पहुँच से बाहर जाती है। दोनों पर अतिरिक्त रन मिल सकता है और दोनों गेंदें ओवर की वैध छह गेंदों में नहीं गिनी जातीं। नो बॉल में फ्रंट-फुट, बीमर या बाउंसर जैसे कारण प्रमुख होते हैं, जबकि वाइड का निर्णय गेंद की दिशा और बल्लेबाज़ की पहुँच से जुड़ा होता है।

प्रश्न: नो बॉल के बाद फ्री-हिट कैसे मिलती है?

उत्तर: अंतरराष्ट्रीय एकदिवसीय और टी20 क्रिकेट में सामान्य नो बॉल के बाद अगली डिलीवरी सामान्यतः फ्री-हिट होती है। यदि अगली गेंद फिर नो बॉल या वाइड हो, तो फ्री-हिट आगे की डिलीवरी तक जारी रह सकती है। फ्री-हिट पर बल्लेबाज़ बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंप्ड नहीं होता, लेकिन रन आउट और कुछ अन्य आउट के तरीके अब भी लागू रहते हैं। टेस्ट क्रिकेट में सामान्यतः फ्री-हिट व्यवस्था नहीं होती।

प्रश्न: क्या नो बॉल पर बल्लेबाज़ बोल्ड या कैच आउट हो सकता है?

उत्तर: सामान्य नो बॉल पर बल्लेबाज़ बोल्ड, कैच, एलबीडब्ल्यू या स्टंप्ड आउट नहीं हो सकता। हालांकि रन आउट, हिट द विकेट, गेंद को दो बार मारना या खेल में अनुचित बाधा डालना कुछ परिस्थितियों में आउट हो सकता है। इसलिए नो बॉल को पूर्ण सुरक्षा नहीं समझना चाहिए। अंपायर पहले नो बॉल की पुष्टि करता है और फिर देखता है कि अपील किस आउट होने के तरीके पर आधारित है।

प्रश्न: कमर से ऊपर फुल टॉस कब नो बॉल होती है?

उत्तर: बिना पिच हुई गेंद यदि बल्लेबाज़ की कमर से ऊपर पहुँचती है, तो वह सामान्यतः नो बॉल मानी जा सकती है। निर्णय बल्लेबाज़ की क्रीज़ पर स्थिति, उसकी सामान्य मुद्रा, गेंद की प्रक्षेपवक्र और गेंदबाज़ी की गति जैसे कारकों पर निर्भर करता है। तेज़ और खतरनाक बीमर पर अंपायर चेतावनी या गेंदबाज़ के विरुद्ध अतिरिक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई भी कर सकता है। स्थानीय और युवा क्रिकेट में सुरक्षा नियम अधिक कठोर हो सकते हैं।

प्रश्न: नो बॉल के नियमों की आधिकारिक जानकारी कहाँ मिलेगी?

उत्तर: नो बॉल के आधिकारिक नियम मेरिलबोन क्रिकेट क्लब के नियम 21 और संबंधित अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की खेल-शर्तों में मिलते हैं। एमसीसी का नियम 21 नो बॉल की परिभाषा, अतिरिक्त रन, ओवर की गिनती और बल्लेबाज़ के आउट होने से जुड़े आधार बताता है। किसी घरेलू लीग, विद्यालयी मैच या आयु-वर्ग प्रतियोगिता में आयोजक की खेल-शर्तें भी अवश्य पढ़ें, क्योंकि बाउंसर और फ्री-हिट की सीमाएँ अलग हो सकती हैं।

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प्रसारण समाप्त

पिच रिपोर्ट · RADICAL ARCHIVE · ISSUE 001

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